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श्लोक 2.100.52  |
कच्चिन्न सर्वे कर्मान्ता: प्रत्यक्षास्तेऽविशङ्कया।
सर्वे वा पुनरुत्सृष्टा मध्यमेवात्र कारणम्॥ ५२॥ |
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| अनुवाद |
| क्या सभी कर्मयोगी निर्भय होकर आपके पास आते हैं? अथवा वे सभी सदैव आपसे दूर ही रहते हैं? क्योंकि कर्मयोगियों के विषय में मध्यमार्ग अपनाना ही आर्थिक उद्देश्यों की सिद्धि का कारण है॥ 52॥ |
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| ‘Do all the people engaged in work fearlessly come to you? Or do they all always stay away from you? Because adopting a middle position in the matter of workers is the reason for achieving economic goals.॥ 52॥ |
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