श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.100.49 
कच्चित् स्त्रिय: सान्त्वयसे कच्चित् तास्ते सुरक्षिता:।
कच्चिन्न श्रद्दधास्यासां कच्चिद् गुह्यं न भाषसे॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
क्या तुम अपनी स्त्रियों को प्रसन्न रखते हो? क्या वे तुम्हारे द्वारा सुरक्षित हैं? क्या तुम उन पर अत्यधिक विश्वास करते हो? क्या तुम उनसे अपने रहस्य साझा करते हो?॥49॥
 
‘Do you keep your women happy? Are they well protected by you? Do you trust them too much? Do you share your secrets with them?॥ 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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