श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.100.31 
बलवन्तश्च कच्चित् ते मुख्या युद्धविशारदा:।
दृष्टापदाना विक्रान्तास्त्वया सत्कृत्य मानिता:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
आपके प्रधान योद्धा (सेनापति) बलवान, युद्धकुशल और शूरवीर हैं न? क्या आपने उनकी वीरता की परीक्षा ली है? और क्या वे आपके द्वारा सम्मानित होते रहते हैं?॥31॥
 
‘Your chief warriors (commanders) are strong, skilled in war and valiant, aren't they? Have you tested their bravery? And do they continue to be honored by you?॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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