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श्लोक 2.100.31  |
बलवन्तश्च कच्चित् ते मुख्या युद्धविशारदा:।
दृष्टापदाना विक्रान्तास्त्वया सत्कृत्य मानिता:॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| आपके प्रधान योद्धा (सेनापति) बलवान, युद्धकुशल और शूरवीर हैं न? क्या आपने उनकी वीरता की परीक्षा ली है? और क्या वे आपके द्वारा सम्मानित होते रहते हैं?॥31॥ |
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| ‘Your chief warriors (commanders) are strong, skilled in war and valiant, aren't they? Have you tested their bravery? And do they continue to be honored by you?॥ 31॥ |
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