श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.100.23 
सहस्राण्यपि मूर्खाणां यद्युपास्ते महीपति:।
अथवाप्ययुतान्येव नास्ति तेषु सहायता॥ २३॥
 
 
अनुवाद
राजा यदि हजार या दस हजार मूर्खों को भी अपने पास रख ले, तो भी वे समय पर कोई विशेष सहायता नहीं करेंगे॥ 23॥
 
‘Even if a king keeps a thousand or ten thousand fools with him, they will not provide any significant help at the right time.॥ 23॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd