श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.100.22 
कच्चित् सहस्रैर्मूर्खाणामेकमिच्छसि पण्डितम्।
पण्डितो ह्यर्थकृच्छ्रेषु कुर्यान्नि:श्रेयसं महत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
क्या तुम हजारों मूर्खों के स्थान पर केवल एक विद्वान को अपने साथ रखना चाहते हो? क्योंकि संकट के समय केवल विद्वान ही महान् कल्याण कर सकता है॥ 22॥
 
‘Do you wish to keep just one learned man with you instead of thousands of fools? Because only a learned man can do great good in times of financial crisis.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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