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श्लोक 2.100.22  |
कच्चित् सहस्रैर्मूर्खाणामेकमिच्छसि पण्डितम्।
पण्डितो ह्यर्थकृच्छ्रेषु कुर्यान्नि:श्रेयसं महत्॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| क्या तुम हजारों मूर्खों के स्थान पर केवल एक विद्वान को अपने साथ रखना चाहते हो? क्योंकि संकट के समय केवल विद्वान ही महान् कल्याण कर सकता है॥ 22॥ |
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| ‘Do you wish to keep just one learned man with you instead of thousands of fools? Because only a learned man can do great good in times of financial crisis.॥ 22॥ |
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