श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.100.19 
कच्चिदर्थं विनिश्चित्य लघुमूलं महोदयम्।
क्षिप्रमारभसे कर्म न दीर्घयसि राघव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! जिस कार्य का साधन तो बहुत छोटा है, परन्तु परिणाम बहुत बड़ा है, उस कार्य का निश्चय करके आप उसे शीघ्रता से आरम्भ कर देते हैं न? उसे करने में आप विलम्ब तो नहीं करते न?॥19॥
 
Raghunandan! After deciding on a task whose means are very small but the result is very big, you start it quickly, don't you? You don't delay in doing it, do you?॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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