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श्लोक 2.100.17  |
कच्चिन्निद्रावशं नैषि कच्चित् कालेऽवबुध्यसे।
कच्चिच्चापररात्रेषु चिन्तयस्यर्थनैपुणम्॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| भारत! क्या तुम समय पर सो जाते हो? क्या तुम समय पर जागते हो? क्या तुम रात्रि के अंतिम प्रहर में अपने लक्ष्य की प्राप्ति के उपाय सोचते हो?॥17॥ |
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| ‘Bharat! Do you fall asleep at odd hours? Do you wake up on time? Do you think of ways to achieve your goals in the last hours of the night?॥ 17॥ |
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