श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.100.17 
कच्चिन्निद्रावशं नैषि कच्चित् कालेऽवबुध्यसे।
कच्चिच्चापररात्रेषु चिन्तयस्यर्थनैपुणम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भारत! क्या तुम समय पर सो जाते हो? क्या तुम समय पर जागते हो? क्या तुम रात्रि के अंतिम प्रहर में अपने लक्ष्य की प्राप्ति के उपाय सोचते हो?॥17॥
 
‘Bharat! Do you fall asleep at odd hours? Do you wake up on time? Do you think of ways to achieve your goals in the last hours of the night?॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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