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श्लोक 2.100.16  |
मन्त्रो विजयमूलं हि राज्ञां भवति राघव।
सुसंवृतो मन्त्रिधुरैरमात्यै: शास्त्रकोविदै:॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| ‘रघुनन्दन! राजाओं की विजय का मुख्य कारण उत्तम मंत्रणा ही है। वह भी तभी सफल होती है, जब नीति और शास्त्रों में पारंगत मन्त्रीगण उसे पूर्णतः गुप्त रखते हैं।॥16॥ |
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| ‘Raghunandan! Good consultation is the main reason for the victory of kings. It too is successful only when the ministers and ministers well versed in ethics and scriptures keep it completely secret.॥ 16॥ |
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