श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.100.14 
इष्वस्त्रवरसम्पन्नमर्थशास्त्रविशारदम्।
सुधन्वानमुपाध्यायं कच्चित् त्वं तात मन्यसे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'भैया! क्या आप आचार्य सुधन्वा का आदर करते हैं, जो बिना मंत्रों के उत्तम बाणों के प्रयोग और मंत्रों सहित उत्तम शस्त्रों के प्रयोग के ज्ञान से युक्त हैं तथा अर्थशास्त्र (राजनीति) के अच्छे विद्वान हैं? 14॥
 
'Brother! Do you respect Acharya Sudhanva, who is full of knowledge of the use of best arrows without mantras and the use of best weapons with mantras and is a good scholar of economics (politics)? 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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