श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.100.12 
कच्चिदग्निषु ते युक्तो विधिज्ञो मतिमानृजु:।
हुतं च होष्यमाणं च काले वेदयते सदा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'क्या ब्राह्मण देवता, जो हवन के कर्म के ज्ञाता, बुद्धिमान और सरल स्वभाव वाले हैं तथा जिन्हें आपने अग्निहोत्र के प्रयोजन के लिए नियुक्त किया है, सदैव समय पर आकर आपको यह बताते हैं कि इस समय अग्नि में आहुति दे दी गई है और अब अमुक समय पर हवन करना है?
 
'Do the Brahmin gods, who are knowledgeable about the rituals of havan, intelligent and simple-natured and whom you have appointed for the purpose of Agnihotra, always come on time and inform you that the oblation has been offered in the fire at this time and now the havan has to be performed at a certain time?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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