| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना » श्लोक 11 |
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| | | | श्लोक 2.100.11  | कच्चिद् विनयसम्पन्न: कुलपुत्रो बहुश्रुत:।
अनसूयुरनुद्रष्टा सत्कृतस्ते पुरोहित:॥ ११॥ | | | | | | अनुवाद | | जो कुलीन कुल में उत्पन्न हुआ है, विनयशील है, बहुत ज्ञानी है, किसी में दोष नहीं देखता तथा शास्त्रों में बताए गए धर्म के नियमों का निरन्तर ध्यान रखता है, उस पुरोहित का क्या तुमने पूरा आदर किया है?॥11॥ | | | | ‘Have you fully honoured that priest who was born in a noble family, is polite, has a lot of knowledge, does not find faults in anyone and constantly keeps an eye on the religious principles prescribed in the scriptures?॥ 11॥ | | ✨ ai-generated | | |
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