श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 10: राजा दशरथ का कैकेयी के भवन में जाना, उसे कोपभवन में स्थित देखकर दुःखी होना और उसको अनेक प्रकार से सान्त्वना देना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.10.38 
तत्र जातं बहु द्रव्यं धनधान्यमजाविकम्।
ततो वृणीष्व कैकेयि यद् यत् त्वं मनसेच्छसि॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
'केकयाराजा नन्दिनी! इनके द्वारा उत्पन्न धन, सम्पत्ति, धान्य, बकरे, भेड़ आदि जो कुछ इसमें उत्पन्न होते हैं, वह सब तुम मुझसे मांगो।
 
'Kekayaraja Nandini! Whatever wealth, riches, grains, goats and sheep etc. produced by them are produced in it, whatever you desire, ask me for that.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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