श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 10: राजा दशरथ का कैकेयी के भवन में जाना, उसे कोपभवन में स्थित देखकर दुःखी होना और उसको अनेक प्रकार से सान्त्वना देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.10.28 
न तेऽहमभिजानामि क्रोधमात्मनि संश्रितम्।
देवि केनाभियुक्तासि केन वासि विमानिता॥ २८॥
 
 
अनुवाद
'देवी! मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि आप मुझ पर क्रोधित हैं। फिर किसने आपका अपमान किया है? किसने आपकी निंदा की है?
 
‘Devi! I cannot believe that you are angry with me. Then who has insulted you? Who has slandered you?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)