श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 10: राजा दशरथ का कैकेयी के भवन में जाना, उसे कोपभवन में स्थित देखकर दुःखी होना और उसको अनेक प्रकार से सान्त्वना देना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  2.10.20-21h 
प्रतिहारी त्वथोवाच संत्रस्ता तु कृताञ्जलि:॥ २०॥
देव देवी भृशं क्रुद्धा क्रोधागारमभिद्रुता।
 
 
अनुवाद
द्वारपाल बहुत भयभीत हो गया। हाथ जोड़कर बोला, 'हे प्रभु! देवी कैकेयी अत्यंत क्रोधित हैं और कोपभवन की ओर दौड़ी हैं।'
 
The gatekeeper was very scared. With folded hands he said, 'O Lord! Goddess Kaikeyi is very angry and has run towards the anger room.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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