vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 10: राजा दशरथ का कैकेयी के भवन में जाना, उसे कोपभवन में स्थित देखकर दुःखी होना और उसको अनेक प्रकार से सान्त्वना देना
»
श्लोक 16-17h
श्लोक
2.10.16-17h
स प्रविश्य महाराज: स्वमन्त:पुरमृद्धिमत्॥ १६॥
न ददर्श स्त्रियं राजा कैकेयीं शयनोत्तमे।
अनुवाद
अपने भव्य अन्तःकक्ष में प्रवेश करते हुए राजा दशरथ ने वहाँ सुन्दर शय्या पर लेटी हुई रानी कैकेयी को नहीं देखा।
Entering his opulent inner chamber, King Dasharatha did not see Queen Kaikeyi on the beautiful bed there. 16 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×