श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 10: राजा दशरथ का कैकेयी के भवन में जाना, उसे कोपभवन में स्थित देखकर दुःखी होना और उसको अनेक प्रकार से सान्त्वना देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.10.14 
दान्तराजतसौवर्णवेदिकाभि: समायुतम्।
नित्यपुष्पफलैर्वृक्षैर्वापीभिरुपशोभितम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वह भवन हाथीदाँत, चाँदी और सोने की बनी हुई वेदियों से, फलदार वृक्षों से तथा बहुत से कुओं से सुशोभित था ॥14॥
 
That building was adorned with altars made of ivory, silver and gold, and with trees blooming and bearing fruits, and with many wells. ॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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