| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 10: राजा दशरथ का कैकेयी के भवन में जाना, उसे कोपभवन में स्थित देखकर दुःखी होना और उसको अनेक प्रकार से सान्त्वना देना » श्लोक 12-13 |
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| | | | श्लोक 2.10.12-13  | शुकबर्हिसमायुक्तं क्रौञ्चहंसरुतायुतम्॥ १२॥
वादित्ररवसंघुष्टं कुब्जावामनिकायुतम्।
लतागृहैश्चित्रगृहैश्चम्पकाशोकशोभितै:॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | उस महल में तोते, मोर, सारस और हंस आदि पक्षी चहचहा रहे थे, वाद्यों की मधुर ध्वनि वहाँ गूंज रही थी, अनेक कुबड़ी और बौनी कन्याएँ वहाँ उपस्थित थीं, चम्पा और अशोक के पुष्पों से सुसज्जित अनेक लताएँ और चित्रशालाएँ उस महल की शोभा बढ़ा रही थीं। | | | | Birds like parrots, peacocks, cranes and swans were chirping in that palace, the sweet sound of musical instruments was resonating there, many hunchbacked and dwarf maids were present there, many creepers and picture galleries decorated with Champa and Ashoka flowers were enhancing the beauty of that palace. | | ✨ ai-generated | | |
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