श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 1: श्रीराम के सद्गुणों का वर्णन, राजा दशरथ का श्रीराम को युवराज बनाने का विचार  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.1.43 
दिव्यन्तरिक्षे भूमौ च घोरमुत्पातजं भयम्।
संचचक्षेऽथ मेधावी शरीरे चात्मनो जराम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान राजा दशरथ ने मंत्री को स्वर्ग, अंतरिक्ष और पृथ्वी में दिखाई देने वाले कष्टों के भयंकर भय से अवगत कराया तथा अपने शरीर में वृद्धावस्था के आगमन की भी सूचना दी ॥43॥
 
Wise King Dashrath informed the minister about the grave fear of the visible troubles in heaven, space and earth and also informed him about the arrival of old age in his body. 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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