श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 1: श्रीराम के सद्गुणों का वर्णन, राजा दशरथ का श्रीराम को युवराज बनाने का विचार  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.1.39 
यमशक्रसमो वीर्ये बृहस्पतिसमो मतौ।
महीधरसमो धृत्यां मत्तश्च गुणवत्तर:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
'श्री राम बल और पराक्रम में यम और इन्द्र के समान हैं, बुद्धि में बृहस्पति के समान हैं और धैर्य में पर्वत के समान हैं। गुणों में वे मुझसे कहीं अधिक श्रेष्ठ हैं॥ 39॥
 
'Shri Ram is equal to Yama and Indra in strength and valour, equal to Jupiter in wisdom and equal to the mountain in patience. In qualities he is far superior to me.॥ 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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