श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 1: श्रीराम के सद्गुणों का वर्णन, राजा दशरथ का श्रीराम को युवराज बनाने का विचार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.1.28 
वैहारिकाणां शिल्पानां विज्ञातार्थविभागवित्।
आरोहे विनये चैव युक्तो वारणवाजिनाम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वह विहार (खेल या मनोरंजन) में प्रयुक्त होने वाले संगीत, वाद्य और चित्रकला आदि कलाओं में भी निपुण था। धन के विभाजन का भी उसे पूर्ण ज्ञान था।* वह हाथी और घोड़ों की सवारी करने और उन्हें नाना प्रकार के करतब सिखाने में भी निपुण था॥ 28॥
 
He was also an expert in the crafts like music, musical instruments and painting etc. used in Vihar (sports or entertainment). He also had a thorough knowledge of division of money.* He was also adept in riding elephants and horses and teaching them various tricks.॥ 28॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas