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ramayan 1.9.6-7h: "इस प्रकार रहते हुए मुनिका का समय अग्नि और तेजस्वी पिता की सेवा में ही व्यतीत होगा।" 6 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.9: सुमन्त्र का दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि को बुलाने की सलाह और शान्ता से विवाह का प्रसंग सुनाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 9: सुमन्त्र का दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि को बुलाने की सलाह और शान्ता से विवाह का प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  1.9.6-7h 
तस्यैवं वर्तमानस्य काल: समभिवर्तत॥ ६॥
अग्निं शुश्रूषमाणस्य पितरं च यशस्विनम्।
 
 
अनुवाद
"इस प्रकार रहते हुए मुनिका का समय अग्नि और तेजस्वी पिता की सेवा में ही व्यतीत होगा।" 6 1/2॥
 
"Living like this, Munika's time will be spent only in the service of Agni and the glorious father." 6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)