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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 9: सुमन्त्र का दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि को बुलाने की सलाह और शान्ता से विवाह का प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.9.19 
ऋष्यशृंगस्तु जामाता पुत्रांस्तव विधास्यति।
सनत्कुमारकथितमेतावद् व्याहृतं मया॥ १९॥
 
 
अनुवाद
"इस प्रकार ऋष्यश्रृंग आपके दामाद हुए। वे यज्ञ का अनुष्ठान करेंगे, जिससे आपको पुत्र प्राप्ति सुगम हो जाएगी। यह बात मैंने सनत्कुमारजी के कथनानुसार आपसे कही है।"॥19॥
 
"In this way Rishyashringa became your son-in-law. He will perform the yajna ceremony which will make it easy for you to have sons. I have told you this as told by Sanatkumaraji."॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)