श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 8: राजा दशरथ का पुत्र के लिये अश्वमेधयज्ञ का प्रस्ताव और मन्त्रियों तथा ब्राह्मणों द्वारा उनका अनुमोदन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.8.5 
तत: सुमन्त्रस्त्वरितं गत्वा त्वरितविक्रम:।
समानयत् स तान् सर्वान् समस्तान् वेदपारगान्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तब अपने पराक्रम को दिखाने में तत्पर सुमन्त्र ने तुरन्त जाकर उन सब वेदज्ञान में पारंगत ऋषियों को वहाँ बुला लिया॥5॥
 
Then Sumanthra, who was quick to display his valour, went immediately and called all those sages, who were well versed in the knowledge of the Vedas, there. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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