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ramayan 1.77.21-22h: अपने पिता की आज्ञा स्वीकार करके वह नगर के नागरिकों के सभी कार्यों की देखभाल करने लगा तथा उनके लिए सभी सुखद और लाभकारी कार्य करने लगा।   |   ramayan सर्ग 1.77: राजा दशरथ का पुत्रों और वधुओं के साथ अयोध्या में प्रवेश, सीता और श्रीराम का पारस्परिक प्रेम   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.77.21-22h 
पितुराज्ञां पुरस्कृत्य पौरकार्याणि सर्वश:॥ २१॥
चकार राम: सर्वाणि प्रियाणि च हितानि च।
 
 
अनुवाद
अपने पिता की आज्ञा स्वीकार करके वह नगर के नागरिकों के सभी कार्यों की देखभाल करने लगा तथा उनके लिए सभी सुखद और लाभकारी कार्य करने लगा।
 
Having accepted his father's command he began to look after all the affairs of the citizens of the city and to do all the pleasant and beneficial deeds for them. 21/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)