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ramayan 1.77.18-19h: वे श्रेष्ठ योद्धा भरत अपने पिता राजा दशरथ, अनायास ही महान् कर्म करने वाले श्री रामजी और समस्त माताओं से पूछकर उनकी अनुमति लेकर शत्रुघ्न के साथ वहाँ से चले गए॥18 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.77: राजा दशरथ का पुत्रों और वधुओं के साथ अयोध्या में प्रवेश, सीता और श्रीराम का पारस्परिक प्रेम   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.77.18-19h 
आपृच्छॺ पितरं शूरो रामं चाक्लिष्टकारिणम्॥ १८॥
मातॄश्चापि नरश्रेष्ठ: शत्रुघ्नसहितो ययौ।
 
 
अनुवाद
वे श्रेष्ठ योद्धा भरत अपने पिता राजा दशरथ, अनायास ही महान् कर्म करने वाले श्री रामजी और समस्त माताओं से पूछकर उनकी अनुमति लेकर शत्रुघ्न के साथ वहाँ से चले गए॥18 1/2॥
 
That best warrior Bharat, after asking his father King Dashrath, Shri Ram who did great deeds without any effort, and all the mothers, took their permission and left from there along with Shatrughan. 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)