श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम का वैष्णव-धनुष को चढ़ाकर अमोघ बाण के द्वारा परशुराम के तपःप्राप्तपुण्य लोकों का नाश करना तथा परशुराम का महेन्द्र पर्वत को लौट जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.76.6 
ब्राह्मणोऽसीति पूज्यो मे विश्वामित्रकृतेन च।
तस्माच्छक्तो न ते राम मोक्तुं प्राणहरं शरम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
(भृगु नन्दन) राम! ब्राह्मण होने के कारण आप मेरे लिए आदरणीय हैं तथा विश्वामित्र जी से भी आपके सम्बन्ध हैं - इन सब कारणों से मैं आपके शरीर पर यह प्राणनाशक बाण नहीं छोड़ सकता।
 
(Bhrigu Nandan) Ram! Being a Brahmin you are respected by me and you are also related to Viswamitra ji - for all these reasons I cannot release this life-killing arrow on your body.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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