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श्लोक 1.75.3  |
तदिदं घोरसंकाशं जामदग्न्यं महद्धनु:।
पूरयस्व शरेणैव स्वबलं दर्शयस्व च॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| 'यह जमदग्निपुत्र परशुराम का विशाल एवं भयंकर धनुष है। इसे खींचो और इस पर बाण चढ़ाकर अपना पराक्रम दिखाओ॥3॥ |
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| 'This is the huge and fearsome bow of Parashurama, son of Jamadagni. Pull it and put an arrow on it and show your strength.॥ 3॥ |
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