श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 75: राजा दशरथ की बात अनसुनी करके परशुराम का श्रीराम को वैष्णव-धनुष पर बाण चढ़ाने के लिये ललकारना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.75.25 
पृथिवीं चाखिलां प्राप्य कश्यपाय महात्मने।
यज्ञस्यान्तेऽददं राम दक्षिणां पुण्यकर्मणे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
"श्रीराम! सम्पूर्ण पृथ्वी पर अधिकार प्राप्त करने के पश्चात् मैंने यज्ञ किया और उस यज्ञ की समाप्ति पर मैंने सम्पूर्ण पृथ्वी पुण्यात्मा महात्मा कश्यप को दक्षिणा में दे दी।
 
"Shri Ram! After gaining control over the entire earth, I performed a yajna and after the completion of that yajna, I gave the entire earth as dakshina to the virtuous Mahatma Kashyap.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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