श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 74: राजा जनक का कन्याओं को भारी दहेज देकर राजा दशरथ आदि को विदा करना, मार्ग में शुभाशुभ शकुन और परशुरामजी का आगमन  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  1.74.20-21h 
तं दृष्ट्वा भीमसंकाशं ज्वलन्तमिव पावकम्।
वसिष्ठप्रमुखा विप्रा जपहोमपरायणा:॥ २०॥
संगता मुनय: सर्वे संजजल्पुरथो मिथ:।
 
 
अनुवाद
प्रज्वलित अग्नि के समान भयंकर प्रतीत होने वाले परशुरामजी को देखकर वसिष्ठजी सहित जप और यज्ञ में तत्पर रहने वाले समस्त ब्रह्मर्षि एकत्रित होकर आपस में इस प्रकार बातें करने लगे -॥20 1/2॥
 
Seeing Parasurama, who appeared as fearsome as a blazing fire, all the Brahmarishis including Vasishtha, who were devoted to chanting and performing sacrifices, gathered together and started talking among themselves in this manner -॥ 20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)