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ramayan 1.73.9-10: तदनन्तर जब विवाह के लिए उपयुक्त विजया का शुभ समय आया, तब श्री रामचन्द्रजी अपने भाइयों के साथ वर के योग्य समस्त वस्त्रों से सुसज्जित होकर वहाँ आये। उन्होंने विवाह का शुभ अनुष्ठान पूरा किया और वसिष्ठ मुनि आदि महर्षियों को आगे करके उस मण्डप में आये। उस समय भगवान वसिष्ठ विदेहराज जनक के पास गए और इस प्रकार बोले -॥9-10॥   |   ramayan सर्ग 1.73: श्रीराम आदि चारों भाइयों का विवाह   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 73: श्रीराम आदि चारों भाइयों का विवाह  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  1.73.9-10 
युक्ते मुहूर्ते विजये सर्वाभरणभूषितै:।
भ्रातृभि: सहितो राम: कृतकौतुकमंगल:॥ ९॥
वसिष्ठं पुरत: कृत्वा महर्षीनपरानपि।
वसिष्ठो भगवानेत्य वैदेहमिदमब्रवीत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर जब विवाह के लिए उपयुक्त विजया का शुभ समय आया, तब श्री रामचन्द्रजी अपने भाइयों के साथ वर के योग्य समस्त वस्त्रों से सुसज्जित होकर वहाँ आये। उन्होंने विवाह का शुभ अनुष्ठान पूरा किया और वसिष्ठ मुनि आदि महर्षियों को आगे करके उस मण्डप में आये। उस समय भगवान वसिष्ठ विदेहराज जनक के पास गए और इस प्रकार बोले -॥9-10॥
 
Thereafter, when the auspicious time of Vijaya, suitable for marriage, arrived, Shri Ramchandraji came there along with his brothers, adorned with all the attire befitting a groom. He had completed the auspicious rituals of marriage and had come to that pavilion, leading Vasishtha Muni and other great sages ahead. At that time, Lord Vasishtha went to Videhraj Janaka and said thus -॥9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)