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ramayan 1.72.18: हे मिथिलेश्वर! आप दोनों भाइयों में असंख्य गुण हैं; आपने ऋषियों और राजकुलों का बहुत अच्छा सत्कार किया है॥18॥   |   ramayan सर्ग 1.72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.72.18 
युवामसंख्येयगुणौ भ्रातरौ मिथिलेश्वरौ।
ऋषयो राजसङ्घाश्च भवद्भॺामभिपूजिता:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे मिथिलेश्वर! आप दोनों भाइयों में असंख्य गुण हैं; आपने ऋषियों और राजकुलों का बहुत अच्छा सत्कार किया है॥18॥
 
'O Mithileshwar! You two brothers have innumerable virtues; you have honoured the sages and the royal families very well.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)