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ramayan 1.70.22: इक्ष्वाकु के पुत्र का नाम कुक्षि था । वह अत्यंत तेजस्वी था । कुक्षि से विकुक्षि नामक तेजस्वी पुत्र उत्पन्न हुआ । 22॥   |   ramayan सर्ग 1.70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.70.22 
इक्ष्वाकोस्तु सुत: श्रीमान् कुक्षिरित्येव विश्रुत:।
कुक्षेरथात्मज: श्रीमान् विकुक्षिरुदपद्यत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इक्ष्वाकु के पुत्र का नाम कुक्षि था । वह अत्यंत तेजस्वी था । कुक्षि से विकुक्षि नामक तेजस्वी पुत्र उत्पन्न हुआ । 22॥
 
'Ikshvaku's son's name was Kukshi. He was very brilliant. From Kukshi a radiant son named Vikukshi was born. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)