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ramayan 1.70.18-19h: जब राजा दशरथ ऐसा कहकर चुप हो गए, तब वाक्य के विशेषज्ञ भगवान वसिष्ठ पुरोहित सहित विदेह राजा से इस प्रकार बोले - ॥18 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  1.70.18-19h 
तूष्णींभूते दशरथे वसिष्ठो भगवानृषि:॥ १८॥
उवाच वाक्यं वाक्यज्ञो वैदेहं सपुरोधसम्।
 
 
अनुवाद
जब राजा दशरथ ऐसा कहकर चुप हो गए, तब वाक्य के विशेषज्ञ भगवान वसिष्ठ पुरोहित सहित विदेह राजा से इस प्रकार बोले - ॥18 1/2॥
 
When King Dasharatha became silent after saying this, then the expert of sentences, Lord Vasishtha spoke to the Videh King along with the priest in this manner - ॥18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)