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ramayan 1.70.15-16h: अपने मन्त्रियों, उपाध्यायों और भाइयों के साथ आये हुए, वाक-कला में श्रेष्ठ विद्वानों में श्रेष्ठ राजा दशरथ ने विदेह के राजा जनक से इस प्रकार कहा॥15 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  1.70.15-16h 
राजा च मन्त्रिसहित: सोपाध्याय: सबान्धव:॥ १५॥
वाक्यं वाक्यविदां श्रेष्ठो वैदेहमिदमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
अपने मन्त्रियों, उपाध्यायों और भाइयों के साथ आये हुए, वाक-कला में श्रेष्ठ विद्वानों में श्रेष्ठ राजा दशरथ ने विदेह के राजा जनक से इस प्रकार कहा॥15 1/2॥
 
Accompanied by his ministers, Upadhyayas and his brothers, King Dasaratha, who was the best among learned men in the art of speaking, spoke to King Janaka of Videhas in the following manner:॥15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)