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ramayan 1.70.13-14h: 'हे अयोध्या के वीर नरेश! मिथिलापति विदेहराज जनक इस समय उपाध्याय और पुरोहित सहित आपसे मिलना चाहते हैं। 13 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  1.70.13-14h 
अयोध्याधिपते वीर वैदेहो मिथिलाधिप:॥ १३॥
स त्वां द्रष्टुं व्यवसित: सोपाध्यायपुरोहितम्।
 
 
अनुवाद
'हे अयोध्या के वीर नरेश! मिथिलापति विदेहराज जनक इस समय उपाध्याय और पुरोहित सहित आपसे मिलना चाहते हैं। 13 1/2॥
 
'The brave king of Ayodhya! Mithilapati Videraj Janak wants to see you at this time along with the Upadhyay and the priest. 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)