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औपकार्यां स गत्वा तु रघूणां कुलवर्धनम्॥ १२॥
ददर्श शिरसा चैनमभिवाद्येदमब्रवीत्।
अनुवाद
आज्ञा पाकर मंत्री सुदामन महाराज दशरथ के शिविर में गए और रघुकुल की शोभा बढ़ाने वाले राजा से मिले तथा उन्हें सिर से प्रणाम करके इस प्रकार बोले- 12 1/2॥
After getting the permission, minister Sudaman went to the camp of Maharaj Dasharatha and met the king who brought glory to Raghukul and after paying obeisance to him with his head, said thus - 12 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥