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ramayan 1.70.10-12h: सिंहासन पर बैठकर उन दोनों परम प्रतापी वीर भाइयों ने महामना सुदामन को भेजकर कहा - 'मंत्री जी! आप तत्काल परम प्रतापी इक्ष्वाकुवंशी रत्न राजा दशरथ के पास जाइये और उन अजेय राजा को उनके पुत्रों तथा मन्त्रियों सहित यहाँ बुलाइये।'   |   ramayan सर्ग 1.70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 10-12h
 
 
श्लोक  1.70.10-12h 
उपविष्टावुभौ तौ तु भ्रातरावमितद्युती॥ १०॥
प्रेषयामासतुर्वीरौ मन्त्रिश्रेष्ठं सुदामनम्।
गच्छ मन्त्रिपते शीघ्रमिक्ष्वाकुममितप्रभम्॥ ११॥
आत्मजै: सह दुर्धर्षमानयस्व समन्त्रिणम्।
 
 
अनुवाद
सिंहासन पर बैठकर उन दोनों परम प्रतापी वीर भाइयों ने महामना सुदामन को भेजकर कहा - 'मंत्री जी! आप तत्काल परम प्रतापी इक्ष्वाकुवंशी रत्न राजा दशरथ के पास जाइये और उन अजेय राजा को उनके पुत्रों तथा मन्त्रियों सहित यहाँ बुलाइये।'
 
Sitting on the throne, those two extremely illustrious brave brothers sent the great minister Sudaman and said - 'Minister! You should immediately go to the extremely illustrious Ikshvaku clan's jewel King Dasharatha and call that unconquerable king here along with his sons and ministers.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)