श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 7: राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.7.21 
अवेक्ष्यमाणश्चारेण प्रजा धर्मेण रक्षयन्।
प्रजानां पालनं कुर्वन्नधर्मं परिवर्जयन्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वह अपने गुप्तचरों की सहायता से अपने राज्य और शत्रु राज्यों के मामलों पर दृष्टि रखता था। वह धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करता था और प्रजा का पालन करते हुए वह सदैव पाप से दूर रहता था ॥21॥
 
He kept an eye on the affairs of his own kingdom and those of his enemy kingdoms with the help of his spies. He looked after his subjects in a righteous manner and while looking after his subjects, he always stayed away from sin. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)