श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 69: दल-बल सहित राजा दशरथ की मिथिला-यात्रा और वहाँ राजा जनक के द्वारा उनका स्वागत-सत्कार  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.69.19 
जनकोऽपि महातेजा: क्रिया धर्मेण तत्त्ववित्।
यज्ञस्य च सुताभ्यां च कृत्वा रात्रिमुवास ह॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अत्यन्त तेजस्वी दार्शनिक राजा जनक ने भी धर्मानुसार यज्ञ किया और अपनी दोनों पुत्रियों के लिए मंगलाचार पढ़कर सुखपूर्वक रात्रि व्यतीत की ॥19॥
 
King Janak, a very brilliant philosopher, also performed the yagya as per the religion and spent the night happily after reciting Mangalachar for his two daughters. 19॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे एकोनसप्ततितम: सर्ग:॥ ६९॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें उनहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६९॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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