श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 67: श्रीराम के द्वारा धनुर्भंग तथा राजा जनक का विश्वामित्र की आज्ञा से राजा दशरथ को बुलाने के लिये मन्त्रियों को भेजना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.67.3 
जनकेन समादिष्टा: सचिवा: प्राविशन् पुरम्।
तद्धनु: पुरत: कृत्वा निर्जग्मुरमितौजस:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजा जनक की आज्ञा पाकर वह महामना नगर में गया और उस धनुष को हाथ में लेकर नगर से बाहर आया।
 
Upon receiving the order from King Janaka, that illustrious minister went into the city and came out of the city holding that bow in his hand.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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