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श्लोक 1.67.27  |
कौशिकस्तु तथेत्याह राजा चाभाष्य मन्त्रिण:।
अयोध्यां प्रेषयामास धर्मात्मा कृतशासनान्।
यथावृत्तं समाख्यातुमानेतुं च नृपं तथा॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| विश्वामित्र ने 'तथास्तु' कहकर राजा की बात का समर्थन किया। तब धर्मात्मा राजा जनक ने अपने आज्ञाकारी मंत्रियों को समझाकर राजा दशरथ को स्थिति से अवगत कराने और उन्हें मिथिलापुरी लाने के लिए भेजा। |
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| Vishwamitra supported the king's words by saying 'Tathastu'. Then the righteous king Janaka explained to his obedient ministers and sent them to inform King Dasharath about the situation and bring him to Mithilapuri. |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे सप्तषष्टितम: सर्ग:॥ ६७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें सरसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६७॥ |
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