श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 67: श्रीराम के द्वारा धनुर्भंग तथा राजा जनक का विश्वामित्र की आज्ञा से राजा दशरथ को बुलाने के लिये मन्त्रियों को भेजना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.67.17 
आरोपयित्वा मौर्वीं च पूरयामास तद्धनु:।
तद् बभञ्ज धनुर्मध्ये नरश्रेष्ठो महायशा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महायशस्वी श्री रामजी ने प्रत्यंचा चढ़ाकर ज्यों ही धनुष को कान तक खींचा, त्यों ही वह बीच में से टूट गया॥17॥
 
As soon as Shri Ram, the most illustrious man after offering the string, pulled the bow till his ear, it broke in the middle. 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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