श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 67: श्रीराम के द्वारा धनुर्भंग तथा राजा जनक का विश्वामित्र की आज्ञा से राजा दशरथ को बुलाने के लिये मन्त्रियों को भेजना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  1.67.15-16 
बाढमित्यब्रवीद् राजा मुनिश्च समभाषत।
लीलया स धनुर्मध्ये जग्राह वचनान्मुने:॥ १५॥
पश्यतां नृसहस्राणां बहूनां रघुनन्दन:।
आरोपयत् स धर्मात्मा सलीलमिव तद्धनु:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तब राजा और ऋषि ने एक स्वर में कहा, "हाँ, ऐसा ही करो।" ऋषि की आज्ञा पाकर रघुकुलपुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने धनुष को बीच से उठाया और खेल-खेल में उस पर प्रत्यंचा चढ़ा दी, मानो कोई खेल हो। उस समय हजारों लोगों की दृष्टि उन पर लगी हुई थी।
 
Then the king and the sage said in one voice, "Yes, do so." By the sage's command, the son of the Raghukul, the righteous Lord Rama, picked up the bow from the middle and playfully strung it as if it was a game. At that time, the eyes of thousands of people were fixed on him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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