श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 66: राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार, धनुष का परिचय देना और धनुष चढ़ा देने पर श्रीराम के साथ ब्याह का निश्चय प्रकट करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.66.7 
एवमुक्तस्तु जनक: प्रत्युवाच महामुनिम्।
श्रूयतामस्य धनुषो यदर्थमिह तिष्ठति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मुनि की यह बात सुनकर राजा जनक ने महामुनि विश्वामित्र से कहा - 'मुनिवर! कृपया इस धनुष की कथा सुनिए। मैं आपको वह उद्देश्य बताता हूँ जिसके लिए यह धनुष यहाँ रखा गया था।'
 
On hearing the sage say this, King Janaka said to the great sage Vishwamitra - 'Munivar! Please listen to the story of this bow. I will tell you the purpose for which this bow was kept here.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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