श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 66: राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार, धनुष का परिचय देना और धनुष चढ़ा देने पर श्रीराम के साथ ब्याह का निश्चय प्रकट करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.66.6 
एतद् दर्शय भद्रं ते कृतकामौ नृपात्मजौ।
दर्शनादस्य धनुषो यथेष्टं प्रतियास्यत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
‘आपका कल्याण हो, उन्हें वह धनुष दिखाइए। इससे उनकी मनोकामना पूर्ण होगी। तब दोनों राजकुमार उस धनुष के दर्शन मात्र से संतुष्ट हो जाएँगे और इच्छानुसार अपनी राजधानी को लौट जाएँगे।’॥6॥
 
‘May you be blessed, show them that bow. This will fulfill their wish. Then both the princes will be satisfied by merely seeing that bow and will return to their capital as per their wish.’॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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