श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 66: राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार, धनुष का परिचय देना और धनुष चढ़ा देने पर श्रीराम के साथ ब्याह का निश्चय प्रकट करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.66.5 
पुत्रौ दशरथस्येमौ क्षत्रियौ लोकविश्रुतौ।
द्रष्टुकामौ धनु:श्रेष्ठं यदेतत्त्वयि तिष्ठति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! राजा दशरथ के ये दोनों पुत्र विश्वविख्यात क्षत्रिय योद्धा हैं और वे आपके यहाँ रखे हुए इस उत्तम धनुष को देखना चाहते हैं॥5॥
 
‘Maharaj! These two sons of King Dasharath are world-renowned Kshatriya warriors and they wish to see this excellent bow that is kept at your place.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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