श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 66: राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार, धनुष का परिचय देना और धनुष चढ़ा देने पर श्रीराम के साथ ब्याह का निश्चय प्रकट करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.66.4 
एवमुक्त: स धर्मात्मा जनकेन महात्मना।
प्रत्युवाच मुनिश्रेष्ठो वाक्यं वाक्यविशारद:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महात्मा जनक के ऐसा कहने पर बोलने में कुशल पुण्यात्मा ऋषि विश्वामित्र ने उनसे यह कहा-॥4॥
 
When Mahatma Janaka said this, the virtuous sage Visvamitra, who was skilled in speaking, said this to him -॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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