श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 66: राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार, धनुष का परिचय देना और धनुष चढ़ा देने पर श्रीराम के साथ ब्याह का निश्चय प्रकट करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.66.26 
यद्यस्य धनुषो राम: कुर्यादारोपणं मुने।
सुतामयोनिजां सीतां दद्यां दाशरथेरहम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'मुने! यदि श्री राम इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा दें, तो मैं अपनी अविवाहित पुत्री सीता को इन दशरथकुमार के हाथों में सौंप दूँगा। 26॥
 
'Mune! If Shri Ram strings this bow, then I will give my unmarried daughter Sita into the hands of this Dashrath Kumar. 26॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे षट्षष्टितम: सर्ग:॥ ६६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें छाछठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६६॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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