श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 66: राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का सत्कार, धनुष का परिचय देना और धनुष चढ़ा देने पर श्रीराम के साथ ब्याह का निश्चय प्रकट करना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  1.66.18-19h 
तेषां जिज्ञासमानानां शैवं धनुरुपाहृतम्॥ १८॥
न शेकुर्ग्रहणे तस्य धनुषस्तोलनेऽपि वा।
 
 
अनुवाद
'मैंने भगवान शिव के इस धनुष को उन राजाओं के सामने रखा जो उसके पराक्रम के विषय में जिज्ञासु थे; परन्तु वे उसे उठा या हिला भी नहीं सके॥18 1/2॥
 
'I placed this bow of Lord Shiva in front of those kings who were curious about his prowess; but they were not even able to lift it or move it.॥ 18 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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