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ramayan 1.65.9-10: इससे तीनों लोकों के प्राणी भयभीत होकर व्याकुल होने लगे। उस समय देवता, ऋषि, गन्धर्व, नाग, सर्प और राक्षस सभी ऋषि की तपस्या से मोहित हो गए। उनके तेज से सबकी कांति फीकी पड़ गई। वे सभी व्याकुल होकर पितामह ब्रह्माजी से बोले-॥9-10॥   |   ramayan सर्ग 1.65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  1.65.9-10 
त्रैलोक्यं येन सम्भ्रान्तमातापितमिवाभवत्।
ततो देवर्षिगन्धर्वा: पन्नगोरगराक्षसा:॥ ९॥
मोहितास्तपसा तस्य तेजसा मन्दरश्मय:।
कश्मलोपहता: सर्वे पितामहमथाब्रुवन्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इससे तीनों लोकों के प्राणी भयभीत होकर व्याकुल होने लगे। उस समय देवता, ऋषि, गन्धर्व, नाग, सर्प और राक्षस सभी ऋषि की तपस्या से मोहित हो गए। उनके तेज से सबकी कांति फीकी पड़ गई। वे सभी व्याकुल होकर पितामह ब्रह्माजी से बोले-॥9-10॥
 
Due to this, the creatures of all the three worlds got frightened and started feeling distressed. At that time, the gods, sages, Gandharvas, serpents, snakes and demons all got fascinated by the sage's penance. Everyone's radiance faded due to his brilliance. All of them were distressed and spoke to the grandfather Brahmaji -॥ 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)